मंगलवार, 11 नवंबर 2008

ये ख़बर नहीं ...!

उन सारे दोस्तों के लिए जो ज़िन्दगी में कहीं न कहीं दूर हो गए...उन पलों के लिए जिन्हें कभी छोड़ना नहीं चाहता था...अच्छी बात ये है कि ना वे दोस्त, ना ही वे पल ख़बर हैं...!

4 टिप्‍पणियां:

Geetashree ने कहा…

हेमंत जी
ब्लाग की दुनिया में आपका भी स्वागत है। लंबा अरसा हुआ, आपका लिखा कुछ भी नहीं पढा। उम्मीद है अब आप नियमित कुछ लिखेंगे। मैंने जितना आपको पढा है उसमें हल्की फुल्की चीजें थीं। मगर उसमें भी एक तेवर और टटकापन था। कमी थी संवेदना की, जो शायद इस तरह के लेखन में मिलती है। आपके लेख पर विस्तार से जल्दी...
गीताश्री

satish ka sansar ने कहा…

हेमंत जी, दोस्तों की सूची में अगर नए नाम जुड़ते चले जाएं तो जिंदगी को नई ताज़गी मिलती है औऱ अगर यह नया नाम उम्र के अनुभव से समृद्ध हो तो इस ताज़गी के साथ उम्र की लंबाई भी जुड़ जाती है. इसलिए वक्त औऱ दोस्तों से शिकायत के बदले अपनी जिंदगी को रचनात्मकता की दिशाओं से जोड़ने के लिए प्रयासरत होना चाहिए. रचना हमें जोड़ती है.

hemant sharma ने कहा…

धन्यवाद गीताजी! आपकी टिप्पणी का इंतज़ार रहेगा.
धन्यवाद सतीशजी! आप से सहमत हूँ. वैसे मैंने यह ब्लॉग मित्रों या वक्त से शिकायत के लिए नहीं बल्कि उन्हें याद करने के लिए शुरू क्या है. फिर भी, आप की टिप्पणी मेरे लिए महत्वपूर्ण है, धन्यवाद! हेमंत शर्मा.

"My Heaven" ने कहा…

samvedanaa ko kuchh dashakon purva kee bhasha mein prakat hote dekh khushi hui.Patrakarita ke dabavon ke beech is samvedanon ko punji ki tarah bachaye rakhiye.
Dharmesh Bhatt